सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है. जब भी ये दिल उदास होता है जाने कौन…
ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता आज। जानिए मिरज़ा ग़ालिब…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है…
सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है.…


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