ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता आज। जानिए मिरज़ा ग़ालिब के वो कोनसे 15 शेर…
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी…
सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है.…
या रब वो न समझे हैं न समझेंगे मेरी बातदे और दिल…
"झुकी झुकी सी नज़र" बेक़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही…


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