वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है उतर भी आओ कभी आसमाँ…
आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई। Looking in…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है…
सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है.…


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