क्या जानिए किस बात पे मग़रूर रही हूँ कहने को तो जिस राह चलाया है…
या रब वो न समझे हैं न समझेंगे मेरी बातदे और दिल उन को जो…
"झुकी झुकी सी नज़र" बेक़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार…
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है …
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी…
ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता आज। जानिए मिरज़ा ग़ालिब…
हमेशा हात में रहते हैं फूल उन के लिए किसी को भेज के मंगवाने थोड़ी होते हैं 'शुऊर' ख़ुद…
हमारे शहर के लोगों का अब अहवाल इतना है कभी अख़बार पढ़ लेना कभी अख़बार हो जाना इस क़दर तेज़…
ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता आज। जानिए मिरज़ा ग़ालिब के वो कोनसे 15 शेर…
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ इक पल के कुछ दो पल के कुछ परों से हल्के होते हैं बरसों…
क्या जानिए किस बात पे मग़रूर रही हूँ कहने को तो जिस राह चलाया है चली हूँ तुम पास नहीं…
"झुकी झुकी सी नज़र" बेक़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं. तू अपने…
आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई। Looking in the mirror, I felt relieved…
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