वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है …
सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है. जब भी ये…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है …
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है …
आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई। Looking in…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है …
"झुकी झुकी सी नज़र" बेक़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार…
क्या जानिए किस बात पे मग़रूर रही हूँ कहने को तो जिस राह चलाया है चली हूँ तुम पास नहीं…
हमेशा हात में रहते हैं फूल उन के लिए किसी को भेज के मंगवाने थोड़ी होते हैं 'शुऊर' ख़ुद…
ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता आज। जानिए मिरज़ा ग़ालिब के वो कोनसे 15 शेर…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है उतर भी आओ कभी आसमाँ…
"झुकी झुकी सी नज़र" बेक़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं. तू अपने…
हमारे शहर के लोगों का अब अहवाल इतना है कभी अख़बार पढ़ लेना कभी अख़बार हो जाना इस क़दर तेज़…
या रब वो न समझे हैं न समझेंगे मेरी बातदे और दिल उन को जो न दे मुझ को ज़बां…
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