आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई। Looking in the mirror, I felt relieved…
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ इक पल के कुछ दो पल के कुछ परों…
या रब वो न समझे हैं न समझेंगे मेरी बातदे और दिल…
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है…
"झुकी झुकी सी नज़र" बेक़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही…


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